Wednesday, November 24, 2010

कभी बेखयाली में यूं ही...

© Written by Tarang Sinha




















कभी बेखयाली में यूं ही...तुम्हें सोचा था
कुछ यूं होगा यह सोचा था
तुम दिल में समाते गए
और मेरी दुनिया बदल गयी
सब में शामिल होकर भी
मैं सब से जुदा हो गयी.



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