Wednesday, January 18, 2023

What is love? By Ariana: My Hindi Translation

 




मोहब्बत क्या है?


सूरज का डूब जाना 

ताकि चाँद अपनी चमक बिखेर सके।

समंदर का साहिल की बंदगी करना,

मुसलसल,

चाहे जितनी ही दफ़ा नामंज़ूर कर दिया जाए।

पतझड़ की बस एक झलक से,

पत्तों का शरमा के सुर्ख़ हो जाना।

या फिर वो सपने 

जो भूल भुलैया में

भटकते मन को रास्ता दिखाते हैं।

दिलों का एक साथ धड़कना,

ताकि वो धुन ज़ेहन में रच बस जाए।


लोगों के लिए मोहब्बत शायद इन्हीं ऐहसासात का नाम हो, पर मेरे लिए मोहब्बत बस तुम हो



My Hindi Translation of my favourite poems



Sunday, January 15, 2023

दिल्ली की सर्दी

 


Image:  Alex Padurariu, Unsplash


'कहाँ रख दिया मैंने अपनी प्यारी टोपी को?' भास्कर ने सोचा। यहीं बिस्तर पर ही तो रखा था शायद। रज़ाई हटाकर, तकियों को हटाकर, यहां तक कि अलमारी में भी देख लिया जहां उसके होने की कोई सम्भावना नहीं थी, पर वो नहीं मिली। एक तो इतनी ठंड से बड़ी कोफ़्त होती है उसे। और उसपर से इन टोपियों और ज़ुराबों की गाहेबगाहे खो जाने वाली आदत बहुत बुरी होती है। बस यही एक टोपी है उसके पास, डार्क मरून रंग की, हाथ से बुनी हुई, जिसे वो घर पे पहनता है। बाहर पहन कर जाओ तो उसके दोस्त कहते, "अरे यार, तुझे कुछ ज़्यादा ही ठंड लगती है। आज के ज़माने में ये वाली टोपी कौन पहनता है? भाभी जी चिढ़ाती नहीं तुझे?"


भाभी जी याने भास्कर की पत्नी नलिनी। वो उसे बहुत चिढ़ाती है, पर अब ठंड लगती है तो लगती है। लोग ना चिढ़ाएं इसके लिए क्या वो फ़न्ने खां बनता फिरे? उसका बस चले तो वो रज़ाई ओढ़कर घूमे। गीतकारों ने दिल्ली की सर्दी पर गाना यूं ही नहीं लिख दिया। उसके मुजफ्फरपुर में तो फिर भी सर्दी थोड़े अदब से आती है पर दिल्ली की सर्दी तो भाई साहब बवाल है। 


नलिनी लेखिका हैं और आजकल स्टडी में बैठी डेडलाइन का पीछा कर रही हैं। भास्कर एक अच्छे पति होने का फ़र्ज निभाते है और उन्हें बिल्कुल डिस्टर्ब नहीं करते। बस लवली-लवली तीन चार दौर चाय का जरूर चलता है।


ये लो, चाय की बात आयी तो अब उसे चाय की तलब होने लगी। और वो चल पड़ा चाय बनाने, मस्त इलायची वाली मीठी, गाढ़ी चाय। नलिनी को ऐसी ही चाय पसंद है। पर किचन में एक बड़ा सा disappointment मुंह बाए खड़ा था, दूध के खाली पतीले के रूप में। यार! अब दूध लाने बाहर जाना होगा वो भी बिना टोपी के। क्या ऐसे नहीं हो सकता कि दो तीन महीने के लिए उसके चारो ओर एक गर्म, अदृश्य बबल बन जाए? बस इतना हो जाए, वो ज़्यादा नहीं मांगता। 


बाहर निकला तो सर्दी के थपेड़े लप्पड़ के माफ़िक लग रहे थे। "और भाई साहब, क्या हाल है?" पड़ोस वाले शर्मा जी ने बत्तीसी निलाकर पूछा।


इतना खुश होने की कौन सी बात है भाई? "अरे भाई साहब, बहुत ठंड है," कहकर भास्कर निकल लिया। 


घर लौटा तो फ़ौरन किचन में गैस जला कर खड़ा हो गया। पहले तो कुछ सेकेंड्स हाथ सेका फिर एक चूल्हे पर दूध और दूसरे पर चाय चढ़ा दिया। शायद नलिनी को पता हो। 


"ये लीजिए नलिनी जी, गरमा गरम चाय।"


"ओह, थैंक्यू, भास्कर जी। शदीद जरूरत थी इसकी।" नलिनी ने लपक कर चाय का कप उठा लिया।


"थैंक्यू छोड़िए, आप तो हमें ये बता दीजिए कि आपने मेरी टोपी को देखा है? कब से ढूंढ रहे हैं पर मिल नहीं रही। 


नलिनी जी मुस्कुरायी और फिर कहा, "जी हां, देखा है।"


"कहाँ?"


"आपके सिर पे।"


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Monday, December 26, 2022

Yaadon Ka Idiot Box With Neelesh Misra Season 7

 




अगस्त की सुबह: तरंग सिन्हा



'बात बे बात पे अपनी ही बात कहता है, मेरे अंदर मेरा छोटा सा शहर रहता है। आप सुन रहे हैं यादों का इडियट बॉक्स विद नीलेश मिसरा, कहानियां जिनमें आप मिलते हैं खुद से...'


हर बार जब मैं यादों का इडियट बॉक्स की ये लाइन सुनती हूँ तो वो मेरे दिल को छू जाती हैं। इस शो
की जाने कितनी कहानियां सुनी हैं मैंने ―कहानियां जिनमें भरे होते हैं ज़िन्दगी के रंग; कहानियां जो आपको अपने साथ लेकर चल पड़ती हैं और जिन्हें सुनते हुए आप पाते हैं सुकून। नीलेश मिसरा जी का कहानी सुनाने का खूबसूरत अंदाज़ इन कहानियों को और खास बनाता है। 
मुझे बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि मैं अब नीलेश मिसरा जी की मंडली का हिस्सा हूं। 
अब इस शो के लिए लिखने का मौका मिला है और ये बात मेरे लिए बहुत मायने रखती है। सबसे खास बात ये है कि मंडली में कहानियों पर चर्चा होती है। कहानियों को सिरे से नकारा नहीं जाता, बल्कि आपको अपनी कहानी के कमज़ोर पहलुओं पर काम करने के लिए प्रेरित किया जाता है, और इस दरम्यान एक लेखक बहुत कुछ सीखता है। अनुलता जी मंडली की क्रिएटिव हेड हैं। साथ ही एक बेहतरीन, अनुभवी लेखिका हैं। और उनके साथ कहानियों पर चर्चा करना, उनके फ़ीडबैक को समझना, उसको ध्यान में रखकर कहानी पर काम करना एक दिलचस्प अनुभव है और ये प्रक्रिया कहानियों को और निखारती है। 




 'Friday Challenge Stories' यादों का इडियट बॉक्स का एक खास सेगमेंट है।
शुक्रवार को 92.7 Big FM पर प्रसारित होती हैं Friday Challenge की छः नन्हीं कहानियां। हम सभी मंडली के सदस्यों को एक वाक्य दिया जाता है और हमें उस वाक्य से शुरू करके एक छोटी सी कहानी लिखनी होती है। ये एक प्रतियोगिता है, जिन छः लेखकों की कहानी सबसे अच्छी होती है, उनका चयन होता है। चैलेंजिंग है, पर मज़ेदार है। अब तक मेरी तीन कहानियां सेलेक्ट हुई हैं। 


और ये है मेरी पहली यादों का इडियट बॉक्स कहानी ―प्रेम-गीत। :) ये कहानियां यूं तो रेडियो पर प्रसारित होती हैं, पर अगर आप वहाँ ना सुन पाएं, या किसी से साझा करना चाहें, तो सारी कहानियां The Slow App पर मौजूद हैं। और हाँ, आप चाहें तो ऐप के 'Participate' सेक्शन में जाकर अपनी कहानियां सबमिट भी कर सकते हैं।

अब तक मेरी दो लम्बी कहानियां आयी हैं। आशा है आगे भी आएंगी। आप सुनिए, जब भी वक्त मिले, और मुझे जरूर बताईयेगा कि कैसी लगी।


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Saturday, November 19, 2022

तुमसे नाराज़ नहीं

 


Image: Nighthawk Shoots, Unsplash


{634 words}


दरवाज़े की घंटी बजी तो मिनी चौंक गयी। इस वक्त कौन हो सकता था? उसने खिड़की से बाहर देखा तो बारिश तेज़ थी। स्ट्रीट लाइट में बूंदें झिलमिला रही थीं।

घंटी फिर बजी तो उसने दरवाज़े पर लगे पीपहोल से झांक कर देखा तो और ज़्यादा चौंक गयी। 'तुम?' उसने दरवाज़ा खोलकर कहा।

'हाँ, तो? नहीं आ सकती मैं तुम्हारे घर?'

'हाँ, आ सकती हो। मतलब इतनी रात को, बारिश भी हो रही है। और अकेली?'

'देर हो जाती है, कभी-कभी,' उसने मिनी की आंखों में झांक कर धीरे से कहा। 'और अकेली?' वो बेसाख़्ता अंदर आ गयी। 'मिनी, मैं कोई बच्ची नहीं हूँ, माँ हूँ तुम्हारी।' 

वो जाकर सोफे पर बैठ गयी और मुस्कुरायी तो जैसे मिनी के एक कमरे का घर भी जवाब में मुस्कुरा दिया। 'तुम झगड़ा कर के आयी थी तो मेरा दिल नहीं लग रहा था,' माँ ने कहा तो मिनी का मन ग्लानि से भर गया। वो वहीं पास पड़ी कुर्सी पर बैठ गयी।

वो पिछले हफ़्ते ही घर से लौटी थी। माँ को उसका यूं बड़े शहर में अकेला रहना पसंद नहीं था। कहती, तुम लड़की हो…हर बार की वही चिखचिख थी।

'तो क्या इतनी अच्छी नौकरी छोड़ दूं और यहां आकर घर बैठ जाऊं? आम अ ट्वेंटी सेवन ईयर ओल्ड वोमन, मैं खयाल रख सकती हूँ अपना,' मिनी ने चिढ़कर कहा था।

'वही तो।' माँ ने अपना दूसरा पासा फेंका। 'अब सत्ताईस साल की हो गयी हो। शादी कब करोगी? बच्चे कब होंगे?'

'हाँ, ज़िन्दगी में कुछ ना करूँ; किसी से भी शादी कर लूं और फिर किचन और बच्चे संभालती फिरूं, तुम्हारी तरह,' मिनी ने तपाक से कहा था। नहीं, कहा नहीं था, उसके मुंह से निकल गया था। माँ का चेहरा कैसे बुझ गया था। पापा भी हैरान होकर उसे देखने लगे थे। मिनी का दिल बैठ गया। 

वो कहना चाहती थी कि 'मेरा वो मतलब नहीं था, कि… आप तो जानते हो कि मैं कितनी जल्दी चिढ़ जाती हूं।' पर वो जानती थी कि अभी वो सब कहना बेमानी था। उसने दिल दुखाया था उनका। पर ये भी जानती थी कि वो उसकी बात दिल में नहीं रखेंगे, माफ़ कर देंगे उसे। हमेशा माफ़ कर देते हैं, शायद इसलिए बदतमीज़ी कर देना आसान होता है।

'अच्छा घर है वैसे तेरा। छोटा सा है पर अच्छा है।' माँ नज़रें घुमाकर इधर उधर देख रही थी। 

'माँ, मैं―' मिनी ने बोलना शुरु किया पर माँ ने टोक दिया। 


'कोई बात नहीं। तब मैं थोड़ी नाराज़ थी पर अब नहीं हूँ। और मैंने सोच लिया है कि अब उस बात पर कभी चिखचिख नहीं करूंगी। सबको अपनी ज़िन्दगी अपनी तरह से जीने का अधिकार है,' माँ ने अपने मरून कलर की तांत की साड़ी के प्लीट्स को ठीक करते हुए कहा। मिनी ने कुछ कहने के लिए मुंह खोला ही था कि माँ ने झट से अपना एक हाथ उठाकर कहा, 'और मैं ये नाराज़गी में नहीं कह रही।' फिर वो मुस्कुरा उठी। 'अच्छे मन से कह रही हूं। मैं तुमसे ज्यादा देर नाराज़ नहीं रह सकती, जानती हो ना?'

मिनी जानती थी। एक मुस्कुराहट उसके होठों पर भी तैर गयी और जैसे मन का भारीपन धुल गया। 'कुछ खाओगी?' उसने पूछा।

'नहीं, भूख नहीं है मुझे।' माँ मिनी को निहार रही थी। मिनी को लगा जाकर गले लग जाए पर वो उठकर माँ के लिए पानी लेने चली गयी। 


उसने ग्लास टेबल पर रख दिया पर माँ ने उठाया नहीं। तब मिनी ने कुछ अजीब सा गौर किया कि माँ इतनी बारिश में आयी थी पर बिल्कुल भी गीली नहीं थी। 


तभी फ़ोन की घंटी बजी। पापा का फ़ोन था। मिनी ने फ़ोन उठाया तो उधर से पापा की थर्रायी हुई आवाज़ आयी। 'मिनी…'


'पापा, क्या हुआ?' उसने घबरा कर कहा और माँ की तरफ़ देखा। माँ की आंखें भर आयी थीं। कुछ अजीब सा था उसकी आंखों में।


'मिनी…मिनी, तुम्हारी मां नहीं रही, बेटा।'


★★★



And it rained...



Saturday, October 8, 2022

चुप्पी...




कैफ़े के अंदर आते ही मेरी नजर सबसे पहले तुम पर पड़ी। ज़ाहिर है, मुझे किसी और से वास्ता भी नहीं क्योंकि मैं यहां इसलिए आया हूँ कि मुझे तुम मिल जाओ। बड़ी सी खिड़की से आती धूप टेबल पर अलसायी सी बिखर गयी है, जैसे तुमसे बातें करना चाहती हों पर तुम अपनी डायरी में कुछ लिख रही हो, कोहनी टेबल पर टिकाए, अपने चेहरे को अपनी हथेली पर सम्भाले हुए। ढीला सा सफेद कुर्ता, एकदम स्पॉटलेस!


तुमपर एक नज़र पड़ती है, और होठों पर मुस्कुराहट दौड़ी चली आती है। मैं तुम्हारी सामने वाली कुर्सी पर बैठ गया। तुमने हड़बड़ा कर मुझे देखा और मुझे पाकर मुस्कुराने की कोशिश की पर तुम्हारे आंखों की उदासी ने उसे जैसे रोक दिया। मेरी मुस्कान थोड़ी और बड़ी हो गयी जैसे तुम्हारी मुस्कान का हौसला बढ़ाना चाह रही हो। 


'खुश लग रहे हो।' तुमने अपनी डायरी बंद करते हुए कहा।


'तकलीफ़ जब आदत बन जाए तो मुस्कुराना भी सीख लेना चाहिए।' मैंने जवाब दिया। तुम्हारी आँखें और उदास हो गयीं। जानता हूँ कि ठीक नहीं हो; ये भी जानता हूँ कि क्या कहोगी, फिर भी पूछ लिया, आदतन। 'तुम कैसी हो?'


'ठीक हूँ।'


एक अजीब सी चुप्पी पसर गयी हमारे दरमियाँ; हारकर शायद धूप से गुफ़्तगू करने लगी है। हमारे बीच ये असहजता नयी है। पहले कितने बेतकल्लुफ़ हुआ करते थे।


'मैं चलती हूँ।' तुमने उठते हुए कहा तो मेरा दाहिना हाथ अनायास टेबल पर चला गया, जैसे तुम्हारा रास्ता रोकना चाहता हो।


'कम से कम ये तो मत छीनो मुझसे,' मैंने कहा। 'ये चंद लम्हें बहुत अहम हैं, मेरे लिए, और तुम कहोगी नहीं पर तुम्हारे लिए भी।' हमारी नज़रें मिलीं, बस कुछ पलों के लिए और जाने कितनी बातें हो गयी हमारे बीच। 


तुम वापस बैठ गयी और बातों का सिलसिला चल पड़ा। फ़ॉर्मल बातें। चुप्पी गायब हुई तो धूप भी ऊबकर धीरे-धीरे जाने लगी है।


'तुम शादी क्यों नहीं कर लेते?' तुमने अचानक पूछा। मेरी नज़रें तुमपर टिक गयीं। और अब तुम्हें लग रहा है कि तुमने ये सवाल किया ही क्यों, है न?


'मुझे तो शादी करने में कोई प्रॉब्लम नहीं पर कोई लड़की मुझसे शादी ही नहीं करना चाहती।'


'नॉनसेंस, तुमसे कोई शादी क्यों नहीं ―'


'क्योंकि मैं उनसे हमेशा सच कह देता हूँ। कि मैं किसी और से प्यार करता हूँ और वो मेरी ज़िन्दगी में हमेशा रहेगी।' मैंने कहा तो तुमने अपनी डायरी फिर से खोल ली। 'अब तुम ही बताओ, जिससे मैं प्यार करता हूँ वो मुझसे शादी नहीं करना चाहती, तो ये सब सुनकर कोई और मुझसे क्यों शादी करना चाहेगी?'


और बस, चुप्पी फिर से हमारे बीच आ बैठी है, खिसकती हुई धूप का छोर पकड़कर।


★★★


अन्य हिन्दी कहानियां


तुमने कहा था...

सुनहरी धूप

मैं परेशां

इत्तेफ़ाक़


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Monday, October 3, 2022

Kahaniyan Sunaati Hain...





Storytelling is more important than the story.


I strongly believe that. 


A good storyteller can make any story, irrespective of the (clichéd) plot, interesting. Recently, I left a book unfinished (actually many) because I didn't find it interesting, and enjoyed another book in the same genre; similar story, well almost.


Pick a genre and you would realize that stories are more or less similar; it's the storytelling that makes a (big) difference. 


So, how to tell a story effectively? How to develop a style that grips your reader right from the beginning? Let me share, as a reader, a few things that work for me.


When I think of good storytelling, I think of one of my aunts. She used to tell stories, real life stories (mostly eerie), in such a captivating way. And she is not even a writer. 


To be a good storyteller, you don't have to use poetic language. Lyrical language has its value, of course, however the more important thing is that the reading experience should be entertaining and joyful. 


If the story isn't entertaining, lyrical language ka hum kya karenge? 


Sometimes, the essence of the story gets lost in the shadow of purple prose. Keep your voice reader friendly, and tell the story without really telling. 'Show, don't tell'; the only rule I follow. 


Here comes the role of dialogues: pleasant, endearing dialogues that tell a lot about the characters and their bonding, without really telling. Also, they help the story pick a pace and move in an interesting manner. Adding unnecessary dialogues (or any sequence, for that matter) ―something that doesn't add anything to the story ―is not a good idea.


And then, of course, the characters! For me, as a reader, the protagonists are the strength of the story. I cannot enjoy reading (or writing) a story if I don't like the protagonists; if I don't connect with them, if I don't feel for them. No matter how unique the story is. Create relatable and likeable characters. They don't have to be too good to be true, but they have to be real. They have to react in a realistic/plausible way. 


Also, no matter what genre you're writing in, a delicious touch of romance and humour always work. It just enhances the flavour of the story. 


The greatest power of a story is that it takes you to another world. Sometimes in the moments when you are looking for an escape. So, tell me a good story. 


क्योंकि कभी-कभी सिर्फ कहानियां होती है जो आपसे बातें करती हैं; कभी-कभी सिर्फ कहानियां ही होती हैं जिससे आप बातें करना चाहते हैं।


This post is a part of Blogchatter Blog Hop




 

Wednesday, September 7, 2022

Book Review: Closer to Okay by Amy Watson




Book: Closer to Okay
Author: Amy Watson

Publisher: Alcove Press
Source: Netgalley


Kyle, a trained pastry chef, is battling her depression and after her fateful suicide attempt, she is living in Hope House, a mental institution, under strict rules and regulations, as she is trying to get better. The window sill of her room is her favourite corner as it overlooks a coffee shop, The Coffee Shop, located right across the street. 
Jamie and Jackson run this coffee shop. Watching them work expertly in their coffee shop brings solace. While Jamie is jovial, always smiling, Jackson dons an intense, unsmiling visage, which attracts Kyle. 


When she gets her off-site privilege, she visits the cafe and meets them in person, finally. She befriends Jamie instantly but it takes some time before Kyle and Jackson bond.


As their friendship burgeons, so many things happen in Hope House and Jackson's personal life. As much as they grow fond of each other, it's not going to be easy. 


Closer to Okay is basically a sweet and sensible love story with a backdrop of mental health. I am not a mental health expert but I felt this subject has been handled thoughtfully. 


I really like the writing style. It's engaging and helped me connect with the story and characters instantly. The story is told in the first person from Kyle's point of view. The narration is slow paced but it doesn't disrupt the flow of the story; in fact it creates a cosy ambience (and I am a very impatient reader). 


The characters are interesting, with their own important roles. Kyle is so sweet. The author has expressed her emotions, dilemma and troubles really well. I really liked Jackson. He is really nice, understanding but a little flawed at the same time. It makes him real. Both Kyle and Jackson have their own past and personal lives and the author has used it very smartly. It tells a lot about their feelings and behaviour but it's not too much to distract the reader from the main plot. 


There are several twists and turns; they aren't over the top but they are capable enough to keep the readers interested.


I liked the setting: I love the coffee shop setting (in general, I find it fascinating!). And Hope House, the mental institution, is an unusual setting. It was sad and heartbreaking at times but it has been handled well. Food description is a bonus.


Just two things bothered me:


I understand the need to tell the story from Kyle's point of view but I really felt that the story demanded Jackson's point of view once in a while. 

The ending seemed a bit abrupt. I won't say it was unsatisfying but it would have been nice if there was a short epilogue (even though I am not a fan of prologue/epilogue). 


Overall, I really liked this book. 


Thank you, Netgalley.




Sunday, August 28, 2022

My Hindi Translation of Chinmayee's Beautiful English Poems

 

Image: My Painting.


Today, I am sharing my Hindi translation of Chinmayee Gayatri Sahu's beautiful poems. Chinmayee is a wonderful writer and poet. 

These poems touched me in certain ways that I could not resist. I have her permission, of course! :-)



My Hindi Translation:


तुम,

मेरी सबसे प्यारी किताब

जाने कितने लम्हे अपने पन्नों में समेटे,

अनूठी, अनगिनत भावों से भरी किताब।


मैं,

उस बुकशेल्फ पर

पहली और आख़िरी बुकमार्क

रुपहली, अनोखी

तुम्हारे ज़ेहन में सिमटी सी


हम,

हम मिले हैं पहले

शायद पिछले कई जन्मों में

और ये है 

हमारी

सच्ची प्रेम कहानी...



My Hindi Translation:


कुछ अक्षर थिरकते हैं 

मेरे मन में,

शब्दों की लड़ियाँ बनने को बेचैन।

वो लड़ियाँ जो मुझे 

किसी और ही दुनिया में ले जाती है।

एक थकन है, फिर भी खुश हूँ।

आतुर,

तुमसे मिलने को

बातें करने को,

मीठी यादें बुनने को।

हंसी बेपरवाह सी

और कुछ बेशकीमती पल

जब मुझे लगे कि, 

'हां, मैंने ज़िंदगी को वाक़ई जिया है!




My Hindi translation:


तुमने मुझे कुछ ऐसे छुआ
जैसे हवा की मीठी सी थपकी,
जैसे सुबह की सुनहरी धूप
जैसे बारिश की मुलायम फुहार
और फिर अचानक यूं लगा
कि मेरे अंदर कुछ है
जो अब भी ज़िन्दा है।
कि मैं महज़ खिलौना नहीं।
कोई है जो मेरी रूह से मुख़ातिब है।
और बस यूं ही
ये सुखद ऐहसास
मेरी आंखों में झिलमिला उठा है।

Hope you like it. :-) Please visit Chinmayee's Twitter profile (and follow) to read many beautiful poems. 



Friday, July 29, 2022

A Bookish Post!




Image: Illustration by Peijin's Art. Love, love, love her illustrations! Please click the Pinterest link to see her fabulous work!


The Bookish Blog Tag


Yesterday, I visited Aishwariya's blog and read her Bookish post, which I found really interesting. She tagged her readers, so since I’m one of them, I’m taking up the tag.


What are 1-3 of your favourite books of all time?


Alampanah by Rafia Manjurul Ameen

Me Before You by Jojo Moyes

Love Virtually (and Every Seventh Wave, the sequel) by Daniel Glattauer (translated from German)



What are 1-3 of your favourite authors of all time?


Sarat Chandra Chattopadhyay

Sophie Kinsella

Debbie Macomber


Who is your favourite female character of all time?


Mini from Swami by Mannu Bhandari (modified version of Sarat Chandra's Swami―original in Bengali)


Scarlett O' Hara. Can't say favourite but she's one of the most striking/badass heroines I have ever read.


Who is your favourite male character in a book?


Will Traynor from Me Before You


What is your favourite mythical world?


The crazy, wonderful world inside my head.


What book has your favourite cover?


Sati Series (By Koral Dasgupta) Covers. Read Ahalya recently. Love it!! One of my favourites this year.


What is your favourite book-to-movie adaptation?


The Kite Runner

Me Before You


If you could make any book into a movie, what would it be?


My own book/stories?


What was your favourite childhood book?


Sci-fi books (Samay Ke Swami, Shukra Grah Par Dhava etc) by Prof. Divakar


Fantasy or sci-fi? (Or neither?)


Depends on the characters and writing style. I've come to realize that if I love the characters and the writing style, I can read and enjoy any genre.



Now, if you're reading it, consider yourself tagged. Do tag me on social media if you decide to take up these questions. I’d love to read your answers. :) My Twitter handle: @TarangSinha