Saturday, October 8, 2022

चुप्पी...




कैफ़े के अंदर आते ही मेरी नजर सबसे पहले तुम पर पड़ी। ज़ाहिर है, मुझे किसी और से वास्ता भी नहीं क्योंकि मैं यहां इसलिए आया हूँ कि मुझे तुम मिल जाओ। बड़ी सी खिड़की से आती धूप टेबल पर अलसायी सी बिखर गयी है, जैसे तुमसे बातें करना चाहती हों पर तुम अपनी डायरी में कुछ लिख रही हो, कोहनी टेबल पर टिकाए, अपने चेहरे को अपनी हथेली पर सम्भाले हुए। ढीला सा सफेद कुर्ता, एकदम स्पॉटलेस!


तुमपर एक नज़र पड़ती है, और होठों पर मुस्कुराहट दौड़ी चली आती है। मैं तुम्हारी सामने वाली कुर्सी पर बैठ गया। तुमने हड़बड़ा कर मुझे देखा और मुझे पाकर मुस्कुराने की कोशिश की पर तुम्हारे आंखों की उदासी ने उसे जैसे रोक दिया। मेरी मुस्कान थोड़ी और बड़ी हो गयी जैसे तुम्हारी मुस्कान का हौसला बढ़ाना चाह रही हो। 


'खुश लग रहे हो।' तुमने अपनी डायरी बंद करते हुए कहा।


'तकलीफ़ जब आदत बन जाए तो मुस्कुराना भी सीख लेना चाहिए।' मैंने जवाब दिया। तुम्हारी आँखें और उदास हो गयीं। जानता हूँ कि ठीक नहीं हो; ये भी जानता हूँ कि क्या कहोगी, फिर भी पूछ लिया, आदतन। 'तुम कैसी हो?'


'ठीक हूँ।'


एक अजीब सी चुप्पी पसर गयी हमारे दरमियाँ; हारकर शायद धूप से गुफ़्तगू करने लगी है। हमारे बीच ये असहजता नयी है। पहले कितने बेतकल्लुफ़ हुआ करते थे।


'मैं चलती हूँ।' तुमने उठते हुए कहा तो मेरा दाहिना हाथ अनायास टेबल पर चला गया, जैसे तुम्हारा रास्ता रोकना चाहता हो।


'कम से कम ये तो मत छीनो मुझसे,' मैंने कहा। 'ये चंद लम्हें बहुत अहम हैं, मेरे लिए, और तुम कहोगी नहीं पर तुम्हारे लिए भी।' हमारी नज़रें मिलीं, बस कुछ पलों के लिए और जाने कितनी बातें हो गयी हमारे बीच। 


तुम वापस बैठ गयी और बातों का सिलसिला चल पड़ा। फ़ॉर्मल बातें। चुप्पी गायब हुई तो धूप भी ऊबकर धीरे-धीरे जाने लगी है।


'तुम शादी क्यों नहीं कर लेते?' तुमने अचानक पूछा। मेरी नज़रें तुमपर टिक गयीं। और अब तुम्हें लग रहा है कि तुमने ये सवाल किया ही क्यों, है न?


'मुझे तो शादी करने में कोई प्रॉब्लम नहीं पर कोई लड़की मुझसे शादी ही नहीं करना चाहती।'


'नॉनसेंस, तुमसे कोई शादी क्यों नहीं ―'


'क्योंकि मैं उनसे हमेशा सच कह देता हूँ। कि मैं किसी और से प्यार करता हूँ और वो मेरी ज़िन्दगी में हमेशा रहेगी।' मैंने कहा तो तुमने अपनी डायरी फिर से खोल ली। 'अब तुम ही बताओ, जिससे मैं प्यार करता हूँ वो मुझसे शादी नहीं करना चाहती, तो ये सब सुनकर कोई और मुझसे क्यों शादी करना चाहेगी?'


और बस, चुप्पी फिर से हमारे बीच आ बैठी है, खिसकती हुई धूप का छोर पकड़कर।


★★★


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4 comments:

  1. Bahut sundar likha hai aapne. Mujhe bahut pasand aai.

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  2. There's nothing sadder than unrequited love. As usual, beautifully expressed.

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